धनतेरस मुहूर्त ,सामग्री ,पूजा विधि महत्व के सहित सम्पूर्ण जानकारी एवं कुछ ज्योतिष उपाए

सर्वप्रथम सभी जातको को दीपवाली की हार्दिक शुभकामनाये ! अब आप ये सोचेंगे की दिवाली तो 19 को महाराज जी आज से ही क्यों शुभकानाएं दे रहे है ?? जी तो हम आपको बताना चाहेंगे की दिवाली होती है 5 दिवस की और जिसकी शुरुआत होती है धनतेरस से आज धनत्रयोदशी है इसीलिए आज से दीपावली प्रारम्भ होती तो इसीलिए शुभकानाएं आज से ! जैसा की आप सभी भलीभाँति परिचित है की धनतेरस को हम धन का त्योहार कहते है पैसा का त्योहार कहते है , पैसा खर्चो कुछ खरीदो घर लेआओ तो ऐसा बिलकुल भी नहीं धनतेरस का पर्व मुख्यतः दो चीज़ो के लिए है
१. इस दिन दीपवाली की शुरुवात होती है अतः इस दिन घर की साफ़ सफाई करनी शुरू होती है
और ये विधान इसीलिए रखा गया है क्योकि भगवान विष्णु , भगवान राम और माँ लछ्मी के पाँव आपके द्वार पर पड़ने के ५ दिन शुरू हो रहे है । अतः घर साफ़ सुथरा हो इसीलिए ये दिन है साफ़ सफाई का
२. धनतेरस को स्वस्थय का भी त्योहार माना जाता हैं इस दिन यमराज जी की पूजा होती है अतः आज के दिन को यमदीवास भी कहते है ।
आज के दौर में हर चीज़ मार्किट से सम्बंधित होकर रह गयी है परन्तु त्योहार की दिव्यता और आवश्यकता एवं महत्व को न भूले आप खूब खरीदारी करिये मार्केट जाइये आध्यात्म आपको आनंद लेने से कभी मन नहीं करता परन्तु आज के दौर में हर त्योहार के पीछे के तत्व को समझे !
तो चलिए अब जानते है आज के शुभ मुहर्त-:

धनतेरस मुहूर्त 17october 2017

राहुकाल – 02:43 PM से 04:09 PM
अभिजीत मुहूर्त – 11:49 AM से 12:12 PM
चर- 08:55 am से 10:22 am
लाभ- 10:22 am से 11:49 am
अमृत- 11:49 am से 01:46 pm
शुभ- 02:43 pm से 04:09 pm
लाभ- 07:09 pm से 08:43 pm
शुभ- 10:26 pm से 11:49 pm
स्थिर लग्न
वृश्चिक- 08 : 35 am से 10:52 am
कुम्भ- 02:45 am से 04:16 pm
वृषभ- 07:21 pm से 09:17 pm
सिहं – 01:49 am से 04:03 am (अगले दिन

धनतेरस में कुछ ज्योतिष उपाए-:

धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्त्व है। शास्त्रों में इस बारे में कहा है कि जिन परिवारों में धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती। घरों में दीपावली की सजावट भी आज ही से प्रारम्भ हो जाती है। इस दिन घरों को स्वच्छ कर, लीप—पोतकर, चौक, रंगोली बना सायंकाल के समय दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का आवाहन किया जाता है। इस दिन पुराने बर्तनों को बदलना व नए बर्तन ख़रीदना शुभ माना गया है। इस दिन चांदी के बर्तन ख़रीदने से तो अत्यधिक पुण्य लाभ होता है। इस दिन हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर लगातार तीन बार अपने शरीर पर फेरना तथा कुंकुम लगाना चाहिए। कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, कुआं, बावली, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाना चाहिए। तुला राशि के सूर्य में चतुर्दशी व अमावस्या की सन्ध्या को जलती लकड़ी की मशाल से पितरों का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
इस दिन धन्वंतरी‍ जी का पूजन करें।
नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें।
सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें।
मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं।
यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं।
हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें।
धनतेरस पूजन विधि -:
धनतेरस में दो प्रकार की पूजा होती होती है
१. प्रदोष काल २. ऋषभ काल की पूजा
प्रदोष काल की पूजा का समय – शाम 6:10 मिनट से 7:52 मिनट तक
ऋषभ काल की पूजा का समय – शाम 7:52 मिनट से 9:52 मिनट तक
ऐसे जलाएं दीपक
शाम के समय नए दीपक में सरसो का तेल भरकर यमराज का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं। दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रख दें।

पूजन का तरीका मन्त्र सहित:-

सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी का चित्र स्थापित करें।
शुद्ध चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें।
श्रीगणेश का ध्यान व पूजन करें।
हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें।
इस मंत्र से ध्यान करें,
देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान
दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो
धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः
ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि…
पुष्प अर्पित कर दें और जल का आचमन करें।
3 बार जल के छींटे दें और यह बोलें …
पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि।
* भगवान धन्वंतरि के चित्र का जल के छींटों और मंत्र से स्नान कराएं।
ॐ धनवन्तरयै नमः
स्नानार्थे जलं समर्पयामि
पंचामृत स्नान कराएं
ॐ धनवन्तरायै नमः
पंचामृत स्नानार्थे पंचामृत समर्पयामि ||
फिर जल से स्नान कराएं।
पंचामृत स्नानान्ते शुद्धोधक स्नानं समर्पयामि ||
इत्र छिड़कें।
सुवासितं इत्रं समर्पयामि
वस्त्र या मौली अर्पित करें
वस्त्रं समर्पयामि
रोली या लाल चंदन से तिलक करें।
गन्धं समर्पयामि (इत्र चढ़ाएं)
अक्षतान् समर्पयामि (चावल चढ़ाएं)
पुष्पं समर्पयामि (फूल चढ़ाएं)
धूपम आघ्रापयामि (अगरबत्ती जलाएं)
दीपकं दर्शयामि ( जलते दीपक की पूजा करें फिर उसी से आरती घुमाएं)
नैवेद्यं निवेद्यामि (प्रसाद चढ़ाएं, प्रसाद के आसपास पानी घुमाएं)
आचमनीयं जलं समर्पयामि… (अपने आसन के आसपास पानी छोड़ें)
ऋतुफलं समर्पयामि (फल चढ़ाएं, फल के चारों तरफ पानी घुमाएं)
ताम्बूलं समर्पयामि (पान चढ़ाएं)
दक्षिणा समर्पयामि (चांदी-सोने के सिक्के अगर खरीदें हैं तो उन्हें अर्पित करें या फिर घर में रखें रुपए-पैसे चढ़ाएं।)
कर्पूर नीराजनं दर्शयामि ( कर्पूर जलाकर आरती करें)
धन्वंतरि जी से यह प्रार्थना करें : हे आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि देव समस्त जगत को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायुष्य प्रदान करें। हमें सपरिवार आरोग्य का वरदान प्रदान करें।
धन तेरस की शाम को प्रदोषकाल में अपने घर के मुख्य दरवाजे पर अन्न की ढेरी पर दोनों तरफ दीपक जलाएं और उस समय यमराजजी का ध्यान करें। यह मंत्र बोलें।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह |
त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यजः प्रीयता मिति ||

कुबेर मं‍त्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधि पतये धनधान्य समृद्धि में देहि दापय दापय स्वाहा।।
अंत में मां लक्ष्मी, कुबेर, गणेश, मिट्टी के हाथी और धन्वंतरि जी सबका एक साथ पूजन करें। आरती करें। आपकी धनतेरस पूजन संपन्न हुई।
इस धनतेरस की विशेष बात यह है कि इस दिन सोना नहीं खरीदें क्योंकि इस दिन सोना खरीदने से घर में चंचलता आ सकती है । बल्कि पुष्य नक्षत्र में खरीदा सोना इस दिन विधिवत पूजा जा सकता है । इससे घर में लक्ष्मी का शुभ स्थायी वास होता है।
इस दिन पीतल और चाँदी खरीदना चाहिए क्योंकि पीतल भगवान धन्वंतरी की धातु है। पीतल खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभता आती है।
चाँदी कुबेर की धातु है। इस दिन चाँदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा में वृद्धि होती है।

नोट-: आप प्रपचों में न उलझे और धनतेरस के तत्व को न भुले

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